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डॉ रूही श्रीवास्तव ने IVF के जरिए कई दंपत्तियों को दिलाया संतान का सुख

डॉ रूही श्रीवास्तव ने IVF के जरिए कई दंपत्तियों को दिलाया संतान का  सुख

भारत में ऐसे कई विवाहित जोड़े हैं जिन्हें संतान का सुख नहीं मिल पाता है । पर साइंस भी इनके गम को दूर करने के लिए कई तकनीकी सुधार मेडिकल साइंस के फील्ड में लेकर आया है। जिनमें से एक महत्वपूर्ण तरीका है आईवीएफ यानी कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन, जिसे आम भाषा में टेस्ट ट्यूब बेबी भी कहते हैं। जिन दंपतियों को संतान सुख नहीं मिल पाता वह इस ऑप्शन को चुनते हैं। राँची के seeds of innocence की डॉक्टर रूही श्रीवास्तव का भी यही कहना है की IVF एक आसान तरीका है जिसे लोगो को अपनाना चाहिए अगर वह संतान सुख से वंचित है.

डॉ रूही श्रीवास्तव सीड्स ऑफ इनोसेंस की हेड है और वह डॉक्टर होने के साथ साथ एक काउंसलर भी है.डॉ रूही ने अपनी MBBS की पढ़ाई कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज से की है और उनहोने अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन भी वही से करने के बाद वह दिल्ली चली गई और  इनफर्टिलिटी ट्रेनिंग वहां से करने के बाद उन्होंने राँची मे इंद्रा IVF मे दो साल काम किया. डॉ रूही ने 2019 मे सीड्स ऑफ इनोसेंस से जुड़ी और उन्होंने 6 महीने के अंदर 40 से 50  दंपत्तियो  को संतान का सुख प्राप्त करवाया. उनके पास किस तरह के ज्यादातर पेशेंट आते हैं यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा ज्यादातर वो जोड़े आते हैं जो 10-15 सालो से बच्चे के लिए कोशिश कर रहे होते है और उन्हें कोई सफलता नहीं मिलती है. बच्चा ना होने की सबसे बड़ा कारण क्या है यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा की सबसे पहले तो महिलाओ की उम्र एक बड़ा करण है 30 साल के बाद महिलाओ को प्रेग्नेंट  होने मे दिकत होती है या फिर tube मे ब्लॉकेज होना भी एक कारण हो सकता है या मेल मे स्पर्म काउंट की कमी की वजह से भी कई बार प्रेगनेंसी मे दिक्कत आती है.

IVF के बारे में लोगों मे कितनी जागरूकता है यह पूछे जाने पर डॉ रूही का कहना था कि लोग अभी भी इससे हिचकिचाते हैं और कई लोगों ने इसके बारे में गलत धारणाएं भी बना रखी है.इसलिए जो भी पेशेंट उनके पास आते हैं सबसे पहले तो वह उन्हें इस ट्रीटमेंट के बारे में पूरी तरह से समझाती हैं और उनकी रजामंदी के बाद ही ट्रीटमेंट को आगे बढ़ाया जाता है. IVF ट्रीटमेंट के बारे में डॉक्टर रूही का कहना है कि यह ट्रीटमेंट बहुत ही आसान होता है. सबसे पहले तो वह पेशेंट की हिस्ट्री देखती हैं जैसे कि शादी को कितने साल हुए हैं और उनकी उम्र क्या है उसके बाद दोनों जोड़े का टेस्ट कराया जाता है. टेस्ट के रिजल्ट आने के बाद फीमेल एग और मेल स्पर्म को लेकर लेबोरेटरी में फर्टिलाइज कराया जाता है. उसके बाद 3 से 5 दिन में एंब्रियो फॉर्म होने के बाद  इसे फीमेल के बॉडी में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है.फिर 15 दिन के बाद फीमेल  का प्रेगनेंसी टेस्ट कराया जाता है. प्रेग्नेंट होने से लेकर 9 महीने तक माँ और बच्चे का ख्याल रखा जाता है. IVF के जरिए जो भी बच्चे जन्म लेते हैं वह स्वस्थ होते है. अंततः डॉक्टर रूही श्रीवास्तव का यही कहना है कि उनकी यही कोशिश रहती ही कि जो भी पेशेंट उनके पास आ रहे हैं उन्हें संतान सुख की प्राप्ति हो.

वह अपने पेशेंट से काफी इमोशनली जुड़ी रहती है और उनकी यही सलाह है की अगर कोई शादीशुदा जोड़ा बच्चे के लिए 2 साल कोशिश करता है और उन्हें रिजल्ट नहीं मिलता है तब उन्हें डॉक्टर से एक बार जरूर दिखा लेना चाहिए और समय  रहते आईवीएफ को अपनाना चाहिए.वही अगर बात करें सफलता दर की तो डॉ रूही के पास जितने भी पेशेंट आए हैं उनमें से 78% को सफलता प्राप्त हुई है। और भी अन्य जानकारीयों के लिए आप दिए गए नंबर 84481 80815 पर संपर्क कर सकते हैं।

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