मुक्ति मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के बीच स्वास्थ्य को लेकर फैलाती है जागरूकता

मुक्ति मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के बीच स्वास्थ्य को लेकर फैलाती है जागरूकता

मासिक धर्म या पीरियड्स... यह लड़कियों में होने वाली सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। यह उतनी ही कुदरती है, जितना कि नाक का बहना। जन्म के वक्त से ही किसी भी लड़की की ओवरी में पहले से लाखों अपरिपक्व अंडे मौजूद होते हैं। 12 से 15 साल की उम्र में लड़कियों को मासिक धर्म होने लगती है और इस उम्र में लड़कियों के शरीर में कई बदलाव भी आते हैं. यह बेहद सहज प्रक्रिया है.

पीरियड्स के दौरान पर्सनल हाइजीन रखने से कई बीमारियों से बचा जा सकता है। अगर उचित साफ-सफाई न रखी जाए तो इंफेक्शन का खतरा हो सकता है। पीरियड्स में अगर पर्सनल हाइजीन का ध्यान न रखा जाए तो इससे बुखार, अनियमित पीरियड्स, खून ज्यादा आने के साथ ही गर्भधारण में भी दिक्कतें हो सकती हैं साथ ही कई खतरनाक बीमारियां भी हो सकती है. पर ज्यादातर महिलाएं पीरियड के दौरान पर्सनल हाइजीन को नजरअंदाज कर देती है.

ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं ऐसा करती है या फिर वह महिलाएं जो आर्थिक रूप से कमजोर होती है वह मासिक धर्म के समय गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती हैं जिसके कारण उन्हें कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीण महिलाओं में मासिक धर्म को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए मुक्ति मिशन ने अपना कदम आगे बढ़ाया है. मुक्ति मिशन एक एनजीओ है जो मासिक धर्म स्वास्थ्य के बारे में लोगों को जागरूक करता है साथ ही महिलाओं को पर्सनल हाइजीन के बारे में बताता. मुक्ति मिशन का संपूर्ण ध्यान स्वतंत्र जागरूकता के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के विषय में लोगों को जागरूक करना है.  मुक्ति मिशन महिलाओं और बच्चों को मुस्कुराहट प्रदान करने का लक्ष्य रखते हैं.मुक्ति मिशन की डायरेक्टर Rashmi saha खुद महिलाओं और लड़कियों को गांव गांव जाकर मासिक धर्म से होने वाली समस्याओं के बारे में जागरूकता फैलातीे हैं. साथ ही अपने एनजीओ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं और लड़कियों  को सैनिटरी पैड्स भी देती है.

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